श्रद्धा और आनंद से परिपूर्ण एक यात्रा

घूमना मुझे शुरू से ही अच्छा लगता है । और छुट्टियों में प्रोग्राम भी बनाते हैं । पर एक सपना रहा कि कभी बद्रीनाथ केदारनाथ जी के लिए प्लान करूँ ।एक तरफ नदी , एक तरफ पहाड़, पहाड़ों से फूटते झरने, बड़े बड़े पत्थर, ग्लेशियर, कल कल की पानी की आवाज , ये सब सोचकर ही रोमांच सा हो जाता है । इसलिए इस बार प्लान कर ही लिया कि बद्रीनात केदारनाथ जाना है ।
इसके लिए इंनोवा बुक की है 7-8 दिन के लिए ।घर से सीधे हरिद्वार जाएंगे ।वहां हर की पैड़ी पर स्नान करके मनसा देवी और चण्डी देवी के दर्शन करेंगे । शाम की आरती देखकर रात को वहीँ रूककर सुबह बदरीनाथ के लिए रवाना होंगे ।Read more…

वास्तविक साथ

सुबह का ये एक घंटा ऐसा होता था जब न तो कोई फ़ोन होता था न नेट न ऐसी न बिस्तर ।बस साथ था लोगों का और प्रकृति का । और जिस साथ से हमें सुकून मिलता है वही होता है वास्तविक साथ।Read more…

मुक्तक (76 )

(226 ) रोते मुस्काते जीवन की मैं एक कहानी लिखती हूँ तेरे मन की अपने मन की जानी पहचानी लिखतीहूँ सरहद पर मरने वाले जो हँसते हँसते बलिदान हुये उन माताओं के लालों की मैं वीर जवानी लिखती हूँ (227Read more…

मुक्तक (75 )

(223 ) धरा काँपी मिटा घरवार है देखो बहा आँसू रहा संसार है देखो न जाने लोग कितने हैं मरे इसमें पड़ी कुदरत की कैसी मार है देखो (224 ) आँख में आँसू नजर आने लगा है अब हर समयRead more…

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मुक्तक (74 )

(220 ) बड़ा अभिमान था खुद पर झुका कर सर नहीं देखा कमाई खूब दौलत धर्म अपना पर नहीं देखा समय की मार तो देखो न काया है न माया है सभी ने साथ अब छोड़ा तुझे मुड़ कर नहींRead more…

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मुक्तक (73 )

(217 ) लेकर समन्दर प्यास के बैठे रहे हम पास समझे नही फिर भी हमारे वो कभी अहसास सहते रहे हम जिन्दगी भर आँसुओं की पीर फिर से बने दुख मीत अपने सुख चले वनवास (218 ) जुल्म को सहनाRead more…

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मुक्तक (72 )

(214 ) हमें जब मिले ख्वाब में ही मिले अधूरे रहे प्यार के सिलसिले खुली आँख ने अश्क भर कर कहा झरे फूल चाहत के जितने खिले (215 ) दर्द हम सहते रहे हैं दूर ही रहते रहे हैं हमRead more…

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मुक्तक (71 )

(211 ) बेहाल ज़िन्दगी को आराम कब मिलेगा बंज़र हुई धरा पर इक फूल कब खिलेगा खाई बहुत हैं’ हमने ठोकर कदम कदम पर अब घाव वक़्त जाने कब देखिये सिलेगा   (२१२) खुद को खुली किताब बनाया नहीं गयाRead more…

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मुक्तक (70 )

(208 ) अलग जबसे हुए हो तुम लगे वनवास सा जीवन नयन में आ गए आँसू लगे परिहास सा जीवन न समझे हो न समझोगे हमारे प्यार की कीमत हकीकत में तुम्हारे बिन हुआ इतिहास सा जीवन (209 ) धराRead more…