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कुण्डलिनी छंद (२ )

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ऐसा कभी न सोचिये , सभी एक से होत

कुछ में तुम गुणवान हो ,कुछ में दूजे होत

कुछ में दूजे होत,खुदी को तुम पहचानो

क्षमता के अनुसार ,शक्ति की महिमा जान

 

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घूमे पहिया वक्त का, असर उमर पे होय

पर टीका राखी वही , असर न उस पर कोय

असर न उस पर कोय, रहे वो साथ पुराना

धागा बाँधे बहन , प्यार का मिले खजाना

(6)
आज़ादी पाए हमें , बीते कितने साल

भूले सारे मूल्य हम ,मानवता बे हाल

मानवता बे हाल, रो रही भारत माता

उठो देश के वीर ,बनो तुम भाग्य विधाता

डॉ अर्चना गुप्ता

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