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कुण्डलिनी छंद (१ ).

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अपनों से तू प्रीत कर ,अपनों को मत खोय

दुख में तेरे सँग चले ,अपना ही प्रिय कोय

अपना ही प्रिय कोय ,अरे ओ भोले भाले

रिश्ते हैं अनमोल ,प्रेम से इन्हें निभाले

२ 

बिन बोले सब बोल दें, दिल की पीड़ा नैन

टूटे दिल को कब मिला, अन्त समय तक चैन

अन्त समय तक चैन ,समझिये इनकी बानी

झर झर झरते नैन, प्रेम की कहें कहानी

3

देख नजर से गैर की ,अपने को मत तोल

मंजिल तेरी  तय करें ,असल ख़ुशी के बोल

असल ख़ुशी के बोल ,ख़ुशी  दुनिया की पाये

हिम्मत से ले काम ,सफल जीवन हो जाये

डॉ अर्चना गुप्ता

 

 

 

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