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ज़िंदगी का फलसफ़ा

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ज़िन्दगी है तोहफा कहा जाता मगर
मेरा फलसफा अलग आता नज़र
निराशा भरी ये जीवन की डगर
सावन भी सूखा आता नज़र

ठोकरें देते राह के पत्थर
पहाड़ के जैसे आते नज़र
गुमनामी भरा मेरा ऐसा सफर
रोशनी में भी तम आता नज़र

बेरंग सा चहुंओर मंज़र
बसंत भी पतझड़ आता नज़र
जब तन्हाई में उठता यादों का बवंडर
ख़ामोशी में तूफां आता नज़र

खाकर पीठपीछे से खंज़र
फ़र्क़ गैर अपनों का नहीं आता नज़र
अलग सा है कुछ ये मेरा सफर

क्यों है ये न जानूँ मगर

डॉ अर्चना गुप्ता

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