images (2)

नहीं शिकवा जिंदगी से कोई

images (2)

देख भीगी पलकें ना सोच लेना

गम है हमें कोई

खुशियां भी भिगो जाती हैं

इन अँखियों को यूँ ही

 

देख यूँ अकेले ना सोच लेना

सताती है तन्हाई

ख्वाबों में बसे रहते हो

हरदम तुम यूँ ही

 

उठे हाथ देख ना सोच लेना

तमन्ना और कोई

दुआ में उठ जाते हैं

शुक्रिया करने यूँ ही

 

तुम तुम ना रहे ना सोच लेना

शिकवा हमें कोई

हम भी ना हम रह पाये

वक़्त के साथ यूं ही

 

ना डर मौत से तो  न सोच लेना

डर ज़िंदगी का कोई

जो मिलना था वो मिल गया

बाकी गवां दिया यूँ ही

 

डॉ अर्चना गुप्ता

 

7 Comments

  • MS commented on July 31, 2014 Reply

    very beautiful poem 🙂

  • Amit Agarwal commented on July 14, 2014 Reply

    I agree with Anubhuti

  • Anubhuti commented on July 12, 2014 Reply

    Incredible work MOM. I’m speechless. Such a heart-touching poem. It is indeed one of your best..:)

  • Anubhuti commented on July 12, 2014 Reply

    Incredible work MOM. One of your best. I’m speechless. Such a heart-touching poem. It is indeed one of your best..:)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *