आज की नारी

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आज  नारी  अबला से सबला बन
नवभारत की अलख जगा रही ।
अग्रणी बन हर क्षेत्र में
जीत का परचम लहरा रही ।

आँखों में सफलता की अनोखी चमक
आँचल में भारत का स्वर्णिम भविष्य
उत्तम परवरिश से सक्षम
राष्ट्र निर्माता बना रही ।

जहाँ होती इसकी देवी रूप में अर्चना
वह आज स्वयं को सशक्त बना
एक नहीं अनेक जिम्मेदारी
बखूबी निभा रही ।

न वो है पुरुष से उच्च
न वो है पुरुष से तुच्छ
वो तो पुरुष के होकर हमकदम
सम्पूर्णता का अपनी अहसास करा रही ।

– डॉ अर्चना गुप्ता

4 Comments

  • Sarvesh Kumar Singh commented on November 19, 2014 Reply

    यह ठीक है कि आज की नारी कविता अतुकान्त है किन्तु यह सामयिक है। क्योंकि आज नवभारत का निर्माण हो रहा है, और इसमें नारी का योगदान बराबर का है, कही कहीं तो पुरुष से भी ज्यादा। इसलिए कविता अच्छी है, भाव से परिपूर्ण है।

    • Dr. Archana Gupta commented on November 21, 2014 Reply

      thanx so much sarvesh ji …aapne meri rachna ko wqt diya …..

  • Abhineet commented on March 26, 2014 Reply

    आज की नारी का एकदम सटीक चित्रण। 🙂

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