images (12)

बेगुनाह

images (12)
बेगुनाह होकर भी
कटघरे में खड़ा होना
बहुत तकलीफ देता है।
चली हूँ केवल
दो कदम एहसास
मीलों का होता है।
सन्नाटे में भी
बस कोलाहल का
भास होता है।
ये कोलाहल

मचा हलचल
सोने भी नही देता है।
मेरे अंदर का सूनापन
मुझे काट खाने
को दौड़ता है।
दिल के जख्मों पर अब
दवा का असर भी
नहीं होता है।
एहसास तुझसे
छले जाने का हरदम
त्रास देता है।

पर घुटी घुटी सी
साँसों को अब भी
तेरा इंतज़ार रहता है।

-डॉ अर्चना गुप्ता

 

4 Comments

  • Deepa agarwal commented on April 10, 2014 Reply

    amazing 🙂

  • Abhineet commented on April 3, 2014 Reply

    I am speechless. You write amazing Mom!!!

    • Dr. Archana Gupta commented on April 4, 2014 Reply

      wow .. its a precious cmnt for a mother from her son. God bless you.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *