माँ

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मुझे माँ इतिहास की
पुस्तक सी लगती है
उसके चेहरे की हर झुर्री
एक एक पन्ना सा लगती है
कितनी ही बार पढ़ लू उसे
मेरी लालसा ही नहीं भरती  है

आज फिर उलझ गयी उन्ही पन्नो में
बचपन से अब तक के पलों में
पढ़ने लगी फिर माँ को
उन्ही झुर्रियों वाली लकीरों में

दिखाई देने लगी मुझेअपनी पुरानी माँ
पुराने बड़े घर मेंहिरनी सी कूदती माँ
कभी खाना बनातीकभी कपड़े धोती माँ
घर को घर बनतीहर दम व्यस्त माँ
कभी डांटती कभीलाड लड़ाती माँ

सजती संवरतीचूड़ी खनखनाती माँ
ना पढ़ने पर  डांट लगाती
अच्छे नम्बरों पर लड्डू बांटती माँ
हम कुछ बन जाएँये सपना बुनती माँ
घर की खुशियों के लिएअपनी
इच्छाओं की तिलांजलि देती माँ

पापा के संगकदम से कदम
मिलाकर चलती माँ
लायक बच्चों के बीच
गर्वान्वित सी खड़ी  माँ
पापा से बिछड़ने पर
आंसू भरी सूनी सूनी
आँखों वाली माँ

वक़्त के साथ कमजोर होती
रुपहली लटों वाली माँ
तन कर चलने वाली अब
घुटने पकड़कर चलती माँ
अपनों के बीच भी कुछ
अकेली अकेली सी माँ
चुप  चुप रहती आँखें मूंदे
ईश्वरको याद करती माँ

पता नहीं कितने
पन्ने  हैंशेष अभी
खो ना दूँ मैइन्हे कही
दौड़ कर समा गयी
उनकी बाँहों में
छुपा कर  अपना चेहरा
उनके आँचल में ।

– डॉ अर्चना गुप्ता

22 Comments

  • Aditya Sinha commented on February 13, 2015 Reply

    You read anything about mother its always sounds new and leaves a divine aura. Beautifully written.

  • विनय प्रजापति commented on August 4, 2014 Reply

    बहुत ही बेहतरीन कविता…

  • pbchaturvedi commented on May 31, 2014 Reply

    लाजवाब प्रस्तुति…
    नयी पोस्ट@बधाई/उफ़ ! ये समाचार चैनल
    नयी पोस्ट@बड़ी दूर से आये हैं

  • hema commented on May 20, 2014 Reply

    touching

  • Reema D'souza commented on May 11, 2014 Reply

    A very touching poem indeed. Loved it.

  • Anubhuti commented on May 11, 2014 Reply

    your words are so heartwarming..:)

  • anuja bhatt commented on May 11, 2014 Reply

    Really beautiful poem.

  • Vinod commented on May 11, 2014 Reply

    Bahut hi achchha chitran kiya hai aapne ‘Maa’ ke baare me…sach aapne dil ke taar jhankrit kar diye…apni maa se bahut door hote huye bhi aapne ek dum unko mere dil ke karreb laa diya…sach Dr. Archna aap ka bahut dhanyawaad.

    • Dr. Archana Gupta commented on May 11, 2014 Reply

      thank u very much .ye kavita mere bhi dil ke bahut kareeb hai……

  • Saru Singhal commented on May 2, 2014 Reply

    Beautiful poem. Mothers are best!

  • Dr.Mamta Singh commented on March 29, 2014 Reply

    Maa ko shabdo main bayan karna bahut mushkil hai.
    Aapne bahut achchha prayas kiya hai.

    • Dr. Archana Gupta commented on March 30, 2014 Reply

      बहुत बहुत धन्यवाद ममता जी। आपकी प्रतिक्रियाओं से हमें प्रेरणा मिलती है।

  • Abhineet commented on March 26, 2014 Reply

    अपने बच्चो पे सब कुछ न्योछावर कर देने वाली माँ।
    बहुत ही ह्रदयस्पर्शी कविता है। 🙂

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