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मुक्तक (२० )

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हमें बेटियाँ ये हँसाती बहुत है

ख़ुशी से सदा चहचहाती बहुत है

पलें गोद  में बन  हमारा जिगर पर

विदाई पे हमको रुलाती बहुत हैं

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वो हमें रोज  लोरी सुनाकर सुलाती है

दर्द सहकर सभी दुख हमारे मिटाती है      ै

रूप भगवान का है  छुपा  रूप में माँ के

हर समय साथ माँ ही हमारा निभाती है

 

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दिल दुखाती बड़ी ये खबर क्या करें

डबडबाती रही ये नज़र क्या करें

दामिनी कह रही वीर मेरे सुनो

ठूंठ से हम खड़े बन शज़र क्या करें

डॉ अर्चना गुप्ता *

 

 

3 Comments

  • Fayaz Pasha commented on January 8, 2015 Reply

    हमें बेटियाँ ये हँसाती बहुत है
    ख़ुशी से सदा चहचहाती बहुत है

    Bahut Badhiya likha hai aapne Archanaji. Kaash sabhi log betiyon ke pyar ko samajh sakte tho har saal laakhon betiyan bach jaate.

  • yogi saraswat commented on January 8, 2015 Reply

    दिल दुखाती बड़ी ये खबर क्या करें

    डबडबाती रही ये नज़र क्या करें

    दामिनी कह रही वीर मेरे सुनो

    ठूंठ से हम खड़े बन शज़र क्या करें
    सुन्दर

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