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मुक्तक (४ )

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१०।
समझ कर नासमझ तुझ को

किया गुमराह ही खुद को

असल था रूप वो तेरा

समझ कब आ सका मुझ को

डॉ अर्चना गुप्ता

११।
जाकर के परदेश हमें यूँ भूल न जाना

जीवन के रिश्तों को प्रियवर आप निभाना

करना अच्छे कर्म सदा अपने जीवन में

जग में प्यारे भारत का सम्मान बढ़ाना

१२।

दर्द गीत हो गये

शब्द मीत हो गये

नैन अश्रु से भरे

हार -जीत हो गये

 

डॉ अर्चना गुप्ता

3 Comments

  • Amit Agarwal commented on September 13, 2014 Reply

    Loved the one at no.10 immensely!
    (…not that the other ones are any less though)

    • Dr. Archana Gupta commented on September 15, 2014 Reply

      thanx amit ji aap hamesha se hi mera utsahvardhan kerte rhe hai ….

  • MS commented on September 9, 2014 Reply

    दर्द गीत हो गये
    शब्द मीत हो गये
    नैन अश्रु से भरे
    हार -जीत हो ग
    nice lines..

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