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मुक्तक (७)

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(१९ )
त्रेता युग में राम बने तुम दुष्टों का संहार किया

द्वापर में श्रीकृष्ण बने पांचाली का उद्धार किया

लेना होगा तुमको हे प्रभु ! फिर अवतार धरातल पर

मानव के कृत्यों ने भू के कण-कण को अंगार किया

(२०)

टूट रहे संयुक्त परिवार

होकर भौतिकता के शिकार

कुछ कारण संवाद हीनता

कुछ मानसिकता है बीमार

 

(२१ )

ऊँची इमारत महानगर की शान है

है भीड़ से भरा खो जाती पहचान है

बस शान शौकत, चैन यहाँ मिलता नहीं

रौनक सुबह शाम दोपहर सुनसान है

डॉ अर्चना गुप्ता

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