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मुक्तक (30 )

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अपनों से कब अधिकार मिला

दिल दर्द मिला कब प्यार मिला

सोने चाँदी की दुनियाँ में

बस जख्मों का उपहार मिला

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वक्त की मार को कौन सह पाया है

दर्द अपने यहाँ कौन कह पाया है

तुम समझ लो मिली साँस गिनती की हैं

यूँ हमेशा यहाँ कौन रह पाया है

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मौसम ने ऐसा वार किया

सर्दी में अत्याचार किया

रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे

ठिठुरन से यूँ बेज़ार किया

 

डॉ अर्चना गुप्ता

 

 

 

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