images (9)

मुक्तक (36 )

images (9)
(106 )
मीत  होकर भी नहीं स्वीकार करते हो

क्यों हमारे प्यार का  व्यापार करते हो

हम समझ पाये नहीं ये आज तक साथी

क्यों भुलाने को हमें लाचार करते हो

(107 )
रूप कैसे है दिखाती ज़िन्दगी भी

खिलखिलाती तो रुलाती ज़िन्दगी भी

साथिया जी लो मिलेगी कब दुबारा

पाठ हरदम ये सिखाती ज़िन्दगी भी

(108 )

आप हो जीवन हमारे

चाँद सूरज और तारे

जिन्दगी कट जाएगी अब

एक दूजे के सहारे

डॉ अर्चना गुप्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *