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मुक्तक (54 )

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यही तो मान है मेरा

यही सम्मान है मेरा

मुझे है गर्व भारत पर

यही अभिमान है मेरा

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कभी पलकें बिछाती है

कभी ये गुल खिलाती है

बड़ी ही है अजब दुनियाँ

ये’काँटे भी चुभाती है

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हर घड़ी में मुस्कुराना चाहिए

वक़्त जैसा हो निभाना चाहिए

जिन्दगी में पर किसी का भी नही

भूल से ये दिल दुखाना चाहिए

डॉ अर्चना गुप्ता

 

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