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मुक्तक (6 )

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बसने इन नैनों में आ गया कोई

बनके दिल की धड़कन छा गया कोई

मैं क्या जानूँ ये सब कुछ हुआ कैसे

चुपके से इस मन को भा गया कोई

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चाहा है बस हमने तुम को

भँवरा तो ना समझो हम को

हम तो हैं बस प्रेम पुजारीँ

सहते रहते हैं हर गम को
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यादें तुम्हारी ,जिन्दगी मेरे लिए

हैं जान से भी कीमती मेरे लिए

मैंने रखा उनको हिफाजत से सदा

वो हैं निशानी प्यार की मेरे लिए

डॉ अर्चना गुप्ता

One Comment

  • MS commented on September 5, 2014 Reply

    बहुत सुंदर पंक्तिया 🙂

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