images (6)

मुक्तक(47 )

images (6)

(139 )
मैं फूल बनूँ जग को महकाती जाऊँ

ममता की मूरत बन ममता दिखलाऊँ

ऑक्टोपस सी बाहें फैला मत रोको

दीपक बन मैं तम को दूर भगाऊँ

(140 )

आपको तस्वीर में अब ढूढ़ती है

आपकी आवाज हरदम गूंजती है

रह न पाते थे बिछड़ कर एक पल भी

फिर गये क्यों छोड़ कर माँ पूछती है

(141 )

करें वो कर्म हम जिससे बढ़े प्रीत

बनायें दुश्मनों को भी सुनो मीत

मिटाकर नफ़रतें हम अब करें प्रेम

चलो गायें सभी मिल प्यार के गीत

डॉ अर्चना गुप्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *