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बेगुनाह

बेगुनाह होकर भी कटघरे में खड़ा होना बहुत तकलीफ देता है। चली हूँ केवल दो कदम एहसास मीलों का होता है। सन्नाटे में भी बस कोलाहल का भास होता है। ये कोलाहल मचा हलचल सोने भी नही देता है। मेरेRead more…

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नारी का मान -सम्मान

आज नारी ने चाहे खुद को कितना ही ऊपर उठाया पुरुष प्रधान समाज में उस पर अत्याचार कहाँ रुक पाया नहीं ये दास्ताँ आज की सदियों से यही होता आया । कौरवों की सभा में जुआ खेला पुरुषों ने सजाRead more…

Basant-Panchmi-festival

रंग और बसंत

पत्तों  की सर सर से लगता है ऐसा कि छेड़ी हवा ने कोई जलतरंग । हवाओं से आती प्यार की  खुशबू मदहोश उसमे हर मन सतरंग । बसंत की बहार फूलों कि भरमार बिखरी चंहुओर मीठी मीठी सुगंध । महकीRead more…

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सपने का सफ़र

बंद आँखों की डिबिया से एक सपने ने देखा झांक कर फिर रोका अपने कदमों को घना  अंधकार  देखकर बाहर निकलने को वो सपना आतुर था असर ना उस पर मन के समझाने  का था वो तो बस मचल पड़ाRead more…

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हम और तुम

चांदनी रात में तुम कहीं हम कहीं पर रुपहली चांदनी दोनों के पास वही रिमझिम बरसात में हम दोनों साथ नहीं पहले बरसात की खुशबू दोनों के पास वही इन गहरी तन्हाइयों में मन भटके चाहे भी कहीं पर यादोंRead more…

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पत्थर दिल

लोग कहते हैं मुझे पत्थर दिल जिन्दा तो हूँ पर जीवन रहित अब ये सच लगता है मुझे भी डरने लगी हूँ अपनी ही परछाई से भी   टकरा कर छोटे बड़े पाषाणों से पत्थर सा दिखने लगा है येRead more…

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रिश्ता माँ बेटी का

खुद माँ बन कर  जाना माँ होने का अहसास माँ और ज्यादा तुझसे मेरा रिश्ता हुआ खास दिल की ख़ुशी अपनी कैसे बयां करू आज पंख मिल गए हो जैसे और उड़ने को पूरा आकाश सोती नहीं जब रातों में आँखRead more…

आज की नारी

आज  नारी  अबला से सबला बन नवभारत की अलख जगा रही । अग्रणी बन हर क्षेत्र में जीत का परचम लहरा रही । आँखों में सफलता की अनोखी चमक आँचल में भारत का स्वर्णिम भविष्य उत्तम परवरिश से सक्षम राष्ट्रRead more…

माँ

मुझे माँ इतिहास की पुस्तक सी लगती है उसके चेहरे की हर झुर्री एक एक पन्ना सा लगती है कितनी ही बार पढ़ लू उसे मेरी लालसा ही नहीं भरती  है आज फिर उलझ गयी उन्ही पन्नो में बचपन सेRead more…