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मुक्तक (४ )

१०। समझ कर नासमझ तुझ को किया गुमराह ही खुद को असल था रूप वो तेरा समझ कब आ सका मुझ को डॉ अर्चना गुप्ता ११। जाकर के परदेश हमें यूँ भूल न जाना जीवन के रिश्तों को प्रियवर आपRead more…

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मुक्तक (३)

७। पेड़ों पर झूले डोल गये बातों का बस्ता खोल गये पीहर  की बीती यादों को आँखों के आँसूं बोल  गये   ८। मौसम ने भी श्रृंगार किया जीवन भी खुशगंवार किया रिमझिम २ मेघा बरसे हर प्रेमी मन गुंजारRead more…

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मुक्तक (२)

४. शब्द से सौ – वार डरते घाव भी हैं शब्द बन हथियार करते घाव भी हैं टूट जाओ गर किसी की बात से तुम शब्द बनकर प्यार भरते घाव भी हैं ५। कोई दंश सर्प का झेल रहा कोईRead more…

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मुक्तक (१ )

१। प्यार जब से मिला खिल कमल हो गए नैन तुम से मिले फिर सजल हो गए थे अधूरे बहुत हम तुम्हारे बिना तुमसे मिलकर सनम हम गजल हो गये २। रिश्ता हमारा था पुराना याद कर जब प्यार काRead more…

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पुनर्जन्म माँ का

बेटे को देकर जन्म बढ़ जाता है माँ का ओहदा सबकी दृष्टि में पर जन्म देकर बेटी को भीग जाती है माँ खुद सृजन की संतुष्टि में बेटी की हर अदा हर मुस्कान भर देती माँ को भावनात्मक तृप्ति मेंRead more…

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कुण्डलिनी छंद (१ ).

  १ अपनों से तू प्रीत कर ,अपनों को मत खोय दुख में तेरे सँग चले ,अपना ही प्रिय कोय अपना ही प्रिय कोय ,अरे ओ भोले भाले रिश्ते हैं अनमोल ,प्रेम से इन्हें निभाले २  बिन बोले सब बोलRead more…

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भोर एक सुकून

भोर चुपके से आती कानों में फुसफुसाती मेरी नींद खुलती मैं  फिर सो जाती अलार्म की घंटी फिर कानों को थपथपाती अंगड़ाई भी आकर मेरे तन को सहलाती विवश हो मैं उठ जाती खोल दरवाजा बाहर आती ताज़ी हवा बनRead more…

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गीत लिखूं एक ऐसा (गीत1 )

  मैं गीत लिखूँ इक ऐसा हो सबके मन  का जैसा ना राजा हो ना रानी हो सब लोगो की बानी सबकी ही गाथा जैसा मैं गीत लिखूँ इक ऐसा हर कोई नाचे गाये   खुशिओं  में झूमा जाये मुस्कायेRead more…

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नहीं शिकवा जिंदगी से कोई

देख भीगी पलकें ना सोच लेना गम है हमें कोई खुशियां भी भिगो जाती हैं इन अँखियों को यूँ ही   देख यूँ अकेले ना सोच लेना सताती है तन्हाई ख्वाबों में बसे रहते हो हरदम तुम यूँ ही  Read more…