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निःशब्द मिलन

तुम्हारा मौन उसमें छिपे शब्द मेरी ख़ामोशी बस उनका अक्स   अनेक कही अनकही बातें…. पहचान लेते हैं हम तुम मेरी ख़ामोशी को तुम पढ़ा करते हो तुम्हारे मौन को मैं लिखा करती हूँ   तुम्हारा मौन हर बार मेरीRead more…

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वक़्त अभी बाकी है

पल के साथ चलते हैं , पल गुजरते जाते हैं , खुद को पाने की बस , कोशिश करते रह जाते हैं।   वक़्त के उस दौर में शायद खुद को ही गौढ़ पाते हैं। कर्तव्यों की बेदी में खुदRead more…

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बोरिंग न्यूज़ खल्लास

बोरिंग न्यूज़ खल्लास … बड़े बड़े सितारों का सुनती ये आगाज़। पर न्यूज़ बोरिंग कब होती हैं। कभी ख़ुशी कभी गम में लिपटी होती हैं। आलम तो ये ,रूह रोती ज्यादा हंसती कम है। कभी महंगाई की मार , नारीRead more…

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एक शिकवा व्यास नदी से

              ऐ नदी तू निरन्तर बहती , झेल दिन भर पाषाणों को क्यूँ हुई इतनी पत्थर दिल सी। देख इन मासूम चेहरों को , आत्मा तेरी तनिक ना हिली। माना गलती थी मानव कीRead more…

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माँ…कैसे जियूं तेरे बिन

हर माँ की एक ही चाहत , जीवन में बेटा आगे बढ़े बहुत , लगा देती तन मन उसके लिए , करती दुआएं लाख उसके लिए।   पर एक दिन मेरा मन भर आया , जब एक बेटे को माँRead more…

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व्यथा धरती की

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष एक रात मैं थी, नींद के दामन  में। मदहोश सी सोई  थी, सपनों के  आँगन  में। तभी सुनी एक करुण पुकार…. कर रही थी रो -रो कर गुहार …. बचा लो मुझे ,करो उपकार। पूछा कौनRead more…

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आंटी

किसी भी शब्दकोष का सबसे बुरा शब्द आंटी। जिस नार को बोलो लगे जैसे मारे कोई संटी। जब निकले कोई नार कर सोलह श्रृंगार। चले जुल्फें लहराकर लचके कमर बल खाकर। और कह दे उसे कोई आंटी। हाल उसका ऐसाRead more…

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जाने क्यूँ

नहीं जानता ये मन क्यूँ तुम्हारा यूँ याद आना हर रंजो गम तुमसे बाँटना चाहना थक जाऊ जब चलते चलते चाहे  तुम्हारा ही हाथ थामना जीवन की हर उलझन चाहे  तुम्ही से सुलझाना फिर षोडशी बन पकड़ हाथ चाहे  कुछRead more…

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अपने कॉलेज की मधुर यादों का झरोंखा

जीवन एक कैनवास मानकर , उकेरती  हर याद  इसपर। थी बीते दिनों को फ़िर ज़ीने की चाहत, सुन रही थी रोज़ मैं उनकी आहट। बढ़ चले कदम खुदबखुद, बस रुके कॉलेज के गेट पर आकर. वही आम ,गुलमोहर आदि  केRead more…