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अभिनन्दन बहु का

पल्लवित हो अपनी जननी के आँचल में रोंपी गई हो अब अपने पिया के आँगन में लेकर हज़ार सपने इन नयनों में अभिनंदन तुम्हारा बहु इस घर में खो गयी मै भी पल भर को उन्ही पलों में जब रखाRead more…

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यादें अतीत की

बादलों के बीच जब चाँद निकल आता मैं खो जाती कहीं सारा जहाँ सो जाता तारों के झुंड में निहारती उसे यादों के झुरमुटों में टटोलती उसे अपने घर का वो अंगना बड़ा याद आता मैं खो जाती कहीं साराRead more…

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बेगुनाह

बेगुनाह होकर भी कटघरे में खड़ा होना बहुत तकलीफ देता है। चली हूँ केवल दो कदम एहसास मीलों का होता है। सन्नाटे में भी बस कोलाहल का भास होता है। ये कोलाहल मचा हलचल सोने भी नही देता है। मेरेRead more…

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नारी का मान -सम्मान

आज नारी ने चाहे खुद को कितना ही ऊपर उठाया पुरुष प्रधान समाज में उस पर अत्याचार कहाँ रुक पाया नहीं ये दास्ताँ आज की सदियों से यही होता आया । कौरवों की सभा में जुआ खेला पुरुषों ने सजाRead more…

Basant-Panchmi-festival

रंग और बसंत

पत्तों  की सर सर से लगता है ऐसा कि छेड़ी हवा ने कोई जलतरंग । हवाओं से आती प्यार की  खुशबू मदहोश उसमे हर मन सतरंग । बसंत की बहार फूलों कि भरमार बिखरी चंहुओर मीठी मीठी सुगंध । महकीRead more…

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सपने का सफ़र

बंद आँखों की डिबिया से एक सपने ने देखा झांक कर फिर रोका अपने कदमों को घना  अंधकार  देखकर बाहर निकलने को वो सपना आतुर था असर ना उस पर मन के समझाने  का था वो तो बस मचल पड़ाRead more…

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हम और तुम

चांदनी रात में तुम कहीं हम कहीं पर रुपहली चांदनी दोनों के पास वही रिमझिम बरसात में हम दोनों साथ नहीं पहले बरसात की खुशबू दोनों के पास वही इन गहरी तन्हाइयों में मन भटके चाहे भी कहीं पर यादोंRead more…

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पत्थर दिल

लोग कहते हैं मुझे पत्थर दिल जिन्दा तो हूँ पर जीवन रहित अब ये सच लगता है मुझे भी डरने लगी हूँ अपनी ही परछाई से भी   टकरा कर छोटे बड़े पाषाणों से पत्थर सा दिखने लगा है येRead more…

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रिश्ता माँ बेटी का

खुद माँ बन कर  जाना माँ होने का अहसास माँ और ज्यादा तुझसे मेरा रिश्ता हुआ खास दिल की ख़ुशी अपनी कैसे बयां करू आज पंख मिल गए हो जैसे और उड़ने को पूरा आकाश सोती नहीं जब रातों में आँखRead more…