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मुक्तक (69 )

(205 ) चलो दिल को जलाकर दिल आज फिर से रौशनी कर दें मिटा कर नफ़रतें, दिल में मुहब्बत की ख़ुशी भर दें दुखी लाचार हैं जिनका नही संसार में कोई हटाकर शूल हम उनके, चुभन की पीर को हर देंRead more…

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मुक्तक (68 )

(202 ) वो चित्र बहुत अब भाता है जो माँ की याद दिलाता है प्यारे प्यारे बचपन के दिन दिखला आँखें भर लाता है (203 ) मीत होकर भी नहीं स्वीकार करते क्यों हमारे प्यार से इन्कार करते आज तकRead more…

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मुक्तक (67 )

(199 ) घर को केवल घर कब जाना घर को मैंने मंदिर माना बच्चों की खुशिओं में जन्नत माँ बनकर मैंने पहचाना (200 ) बनाते सैकड़ों झूठे बहाने गए थे गोपियों को तुम सताने नहीं अब बोलती कान्हा सुनो मैंRead more…

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“अभिव्यक्ति “

मन के अंधेरों में छिपी रहती किवाड़ों के पीछे कुछ ठिठकी सी भावनायें खिड़की के शीशे पर सर पटकती पानी की बूंदें दस्तक सी देती मन की तलहटी पर भिगो जाती पलकों के गलियारे ढूंढ लेते ये सभी शब्दों काRead more…

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मुक्तक (66 )

(196 ) तुम मान करना पर कभी अभिमान मत करना माता पिता का तुम कभी अपमान मत करना उनसे मिली ये ज़िन्दगी उनकी अमानत है उनसे अलग अपनी कभी पहचान मत करना (197 ) गये जब भूल तुम हमको  चहकतेRead more…

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मुक्तक (65 )

(193 ) प्यार का जादू चलाना छोड़ दो इस तरह से दिल जलाना छोड़ दो है बहुत नाजुक हमारा दिल सनम रूप की बिजली गिराना छोड़ दो (194 ) दो ह्दय जो मिले प्रेम के हैं सुमन बन कमल दलRead more…

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मुक्तक (64 )

(190 ) चमन में फूल लाखों हैं मगर इक दिल लुभाता है किया कब प्यार जाता है , हो’ अपने आप जाता है नहीं सीधी डगर है प्यार की दिल जानता है पर कहाँ परवाह करता वो ख़ुशी से जांRead more…

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मुक्तक (63 )

(187 ) पीर की है नदी अश्क की धार है डूबते पर नहीं प्रीत पतवार है रीत बेदर्द है इस जहाँ की बड़ी है जुदाई वहाँ पर जहाँ प्यार है (188 ) छुपाना कठिन है बहुत प्यार मेरा अधूरा रहेगाRead more…

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मुक्तक (62 )

(184 ) कमाया नाम भी हमने कमाई खूब दौलत भी नहीं अब साथ में कोई खड़े तन्हा अकेले ही कभी जब धन नहीं था सोचते थे धन ख़ुशी देगा मगर जाना ये’ अब हमने वही खुशियाँ थी’ प्यारी सी  (185Read more…