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मुक्तक (46 )

(136 ) काली काली जुल्फों से ,इक लट ऐसी छितराई चाँद सरीखे मुखड़े पर, आवारा सी लहराई काले नैन कटीले उस के गालों में है डिम्पल गौरी ने दर्पण देखा ,तो खुद पर ही शरमाई (137 ) चले आज पावनRead more…

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मुक्तक (45 )

(133 ) यदि कदम फूंक कर मै चला नहीं होता पाँव मेरा जले बिन बचा नहीं होता मुश्किलों से कभी भी डरा नहीं वरना मैं यहाँ गिर के फिर से उठा नहीं होता (134 ) कष्टों से हम लड़ लेतेRead more…

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मुक्तक (44 )

(130 ) सब कहते बेटी का करते कन्यादान बेटी तो होती है मात पिता की जान दान जिसे करते अपना हीरा अनमोल सर आँखों पर बैठा कहते उसको मान (131 ) कितना मिलता खग का देखो मानव से व्यवहार हैRead more…

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मुक्तक (43 )

(127 ) धरती माँ का हमको कर्ज चुकाना है अपनी माँ का हमको दर्द मिटाना है इक इक पौधा जीवन देने वाला हो हम सबको मिलजुल कर फ़र्ज़ निभानाहै (128 ) धूप खिली है आज धरा मुस्काई है ठिठुरन सेRead more…

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मुक्तक (४२ )

(124 ) घाव मन के पुराने हरे हो गये आज वो सामने जब खड़े हो गये मुश्किलों से भुलाया उन्हें था मगर ये नयन देख फिर बावरे हो गये (125 ) इम्तहानों के जमाने हो गये बिन हँसे ही येRead more…

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मुक्तक (41 )

(121 ) ऐसा क्यों कर कहते हो तुम पलकों पर रहते हो जीवन के हर सुख दुख को साथ तुम्हीं तो सहते हो (122 ) मै अकेले सफ़र कर रहा हूँ ज़िन्दगी यूँ बसर कर रहा हूँ रोशनी तो मिलीRead more…

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मुक्तक (40 )

(118 ) जुल्मी घटा घिरी है कितना हमें डराये अब आँख से हमारी सावन बरस न जाये नित रोज ही बहाने करते नये नये तुम हम प्यार ये तुम्हारा बिल्कुल समझ न पाये (119 ) बस याद हमको आपकी नादानियाँRead more…

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मुक्तक (39 )

(115 ) कहने को तो झंडे का सत्कार किया करते हो तेरा मेरा कहकर फिर तकरार किया करते हो सतरंगी दुनियाँ में देखो सारे रंग सुनहरे केवल अपने रंगों से क्यों प्यार किया करते हो (116 ) मेरे भारत काRead more…

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मुक्तक (38 )

(112 ) झुर्रियां  अब बे हिसाब बन गई मोहब्बतों की किताब बन गईं याद माँ की आ रही है  देखकर पाखुरी खिल खिल गुलाब  बन गईं (113 ) गुनगुनी धूप का हो रहा भास है दूर होगी गलन अब यहीRead more…