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मुक्तक (28)

(82) मन की  ख़ुशी कैसे मन  में समाये े मोती ख़ुशी के नयन ने लुटाये अभिमान मेरा तुम्ही तो हो  बच्चो       ै तुमको नजर से  ये ईश्वर बचाये (83) कभी वो नाम देता है कभी इल्ज़ाम देता है अजब मेराRead more…

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मुक्तक (29)

(85 ) दोस्त जब बादलों को बनाया हमने जो कलम ने लिखा वो सुनाया हमने एक सैलाब सा आ गया धरती पर ‘अर्चना’ हाल जब भी बताया हमने 86 ) तन्हा हमारा दिल बिचारा हो गया तुम से बिछुड़ना फिरRead more…

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मुक्तक (27 )

(79 ) जी रहे स्वप्न के गाँव में आपके प्यार की छाँव में जब मिले आपसे हम सजन बज  उठी झांझरी पाँव में (80 ) हंस की रात रानी सुनो दो दिलों की कहानी सुनो चाँद भी आज शरमा गयाRead more…

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मुक्तक (26 )

(76 ) भ्रूण हत्या की खिलाफत हम सदा करते रहेंगे बेटियों का हक़ दिलाने के लिए लड़ते रहेंगे जन्म लेकर इस धरा पर जी रही हैं रोज  मर मर कब तलक हम देख अत्याचार यूँ डरते रहेंगे (77 ) माँRead more…

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मुक्तक (25 )

(73) आज भी ये चाँद पूछे इस विरह में क्यों जले हम क्यों न थामा हाथ जब थे  रात पूनम की मिले हम हसरतें मन में रहीं हैं ख्वाब भी पलते रहे सब मीत अब कैसे जियेंगे जब जमाने ने छलेRead more…

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मुक्तक (24)

(70) काँटा हूँ चुभता रहता हूँ फूलों से कब कुछ कहता हूँ आकर रस पी जाता भँवरा बेबस हो मैं सब सहता हूँ (71) हाथ सर पर आपका जब से मिला हमको ना रहा भगवान से कोई गिला हमको मित्रRead more…

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मुक्तक (23 )

(67 ) तुमको मुहब्बत से कहाँ सम्वाद करना है तुमसे बहस करना समय बरबाद करना है तुमको समझ जब आयगी ये बात मेरी तो उस वक्त तुमको बस मुझे ही याद करना है (68 ) ये दिल सबकी खातिर दुखताRead more…

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मुक्तक (22 )

(64 ) जब भी खुद को गम में पाती दर्पण को आगे रखती हूँ जब भी देखूँ मैं दर्पण में खुद से ही बातें करती हूँ सच है अच्छा मीत न कोई खुद से ज्यादा होता जग में चाहे कितनीRead more…

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मुक्तक (21 )

(61 ) खिली  ये चांदनी अब  भी हमें छूकर जलाती है पिया तुम क्यों नही आते तुम्हारी याद आती हैै तुम्हे चाहा सदा इस  जान से ज्यादा हमेशा ही मगर ये  बेरुखी हर पल हमारा दिल दुखाती  है   (62Read more…