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मुक्तक (67 )

(199 ) घर को केवल घर कब जाना घर को मैंने मंदिर माना बच्चों की खुशिओं में जन्नत माँ बनकर मैंने पहचाना (200 ) बनाते सैकड़ों झूठे बहाने गए थे गोपियों को तुम सताने नहीं अब बोलती कान्हा सुनो मैंRead more…

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मुक्तक (66 )

(196 ) तुम मान करना पर कभी अभिमान मत करना माता पिता का तुम कभी अपमान मत करना उनसे मिली ये ज़िन्दगी उनकी अमानत है उनसे अलग अपनी कभी पहचान मत करना (197 ) गये जब भूल तुम हमको  चहकतेRead more…

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मुक्तक (65 )

(193 ) प्यार का जादू चलाना छोड़ दो इस तरह से दिल जलाना छोड़ दो है बहुत नाजुक हमारा दिल सनम रूप की बिजली गिराना छोड़ दो (194 ) दो ह्दय जो मिले प्रेम के हैं सुमन बन कमल दलRead more…

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मुक्तक (64 )

(190 ) चमन में फूल लाखों हैं मगर इक दिल लुभाता है किया कब प्यार जाता है , हो’ अपने आप जाता है नहीं सीधी डगर है प्यार की दिल जानता है पर कहाँ परवाह करता वो ख़ुशी से जांRead more…

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मुक्तक (63 )

(187 ) पीर की है नदी अश्क की धार है डूबते पर नहीं प्रीत पतवार है रीत बेदर्द है इस जहाँ की बड़ी है जुदाई वहाँ पर जहाँ प्यार है (188 ) छुपाना कठिन है बहुत प्यार मेरा अधूरा रहेगाRead more…

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मुक्तक (62 )

(184 ) कमाया नाम भी हमने कमाई खूब दौलत भी नहीं अब साथ में कोई खड़े तन्हा अकेले ही कभी जब धन नहीं था सोचते थे धन ख़ुशी देगा मगर जाना ये’ अब हमने वही खुशियाँ थी’ प्यारी सी  (185Read more…

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मुक्तक (61 )

  (181 ) अभिनन्दन करते हैं आज तुम्हारा है साथ तुम्हारे आशीष हमारा अपनी जान बसी है जिसमें हर पल सौंप दिया तुमको वो अपना प्यारा (182 ) किताबों में जहां कब ढ़ूँढता है वो जहाँ गूगल वहीँ पर डूबताRead more…