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तकरार धूप और ए सी की

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कड़ी ठण्ड मे छत परबैठी
धूप कहे ए सी से इतराए।
मेरे तो दीवाने सब
तू यहाँ पड़ा कुम्हलाये।
मेरे कतरे की भी क़ीमत
में दिखूं तो सब मुस्काये।
मुझको पाने को  आतुर सब
वस्त्र भी उन्हे ना भाये ।
मेरी संगत मे जीवन का
सब आनंद लेते जाएँ।
ना निकलू तो देखेँ रस्ता
सब टकटकी लगाएं।

ए सी बोला मत कर बहना
घमंड ये टूट ना जाये।
गर्मी के दिन आने दे
तू किसी से सही ना जाये।
तुझसे ही बचने की खातिर
ये मोटे पर्दे लटकाएं।
बाहर भी निकले गर कोई
पूरा ही ढक कर जाये।
आज तू हंस ले दिन सर्दी के
सब तुझको गले लगायेँ।
तपती दहकती गर्मी मे
कोई मेरे बिन रह ना पाएं।

समय समय की बात है
कब किसका वक़्त बदल जाये।
आज जो तेरे अपने हैं
कल यही मुझे अपनायेँ।

डॉ अर्चना गुप्ता

 

 

6 Comments

  • Dr.Mamta Singh commented on May 8, 2014 Reply

    Achchhi kavita hai

  • hemant commented on May 8, 2014 Reply

    Wow…this reminds me of the light hindi poem we used to read in childhood…

    • Dr. Archana Gupta commented on May 11, 2014 Reply

      bahut 2 shukriya tarif ke liye kuki inhi se mujhe urja milti hai aur likhne ki……

  • Alok Vats commented on May 8, 2014 Reply

    Wow, truly awesome. I really like this Nok-Jhonk….

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