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मुक्तक (12 )

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बिना श्रद्धा नहीं जीवन दृष्टि

बिना श्रद्धा नहीं सुख की वृष्टि

रखो श्रद्धा गुरू हो या ईश

तभी सुन्दर बनेगी ये सृष्टि

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हो रही सब तरफ पाप की गर्जना

हम मिटा दें इसे हो सफल अर्चना

हाथ पर हाथ रख बैठना अब नहीं

है हमारी यही आप से प्रार्थना

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नेता जब जब भरते पर्चा

बस मुद्दों पर करते चर्चा

वादे कर जाते बड़े बड़े

कहने में लगता क्या खर्चा

डॉ अर्चना गुप्ता

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