Basant-Panchmi-festival

रंग और बसंत

Basant-Panchmi-festival
पत्तों  की सर सर से
लगता है ऐसा
कि छेड़ी हवा ने
कोई जलतरंग ।

हवाओं से आती
प्यार की  खुशबू
मदहोश उसमे
हर मन सतरंग ।

बसंत की बहार
फूलों कि भरमार
बिखरी चंहुओर
मीठी मीठी सुगंध ।

महकी फ़िज़ायें
अमवा बौराये
सुन कोयल की कुहू
थिरके अंग अंग ।

होली की  बेला
हर कोई खेला
रंगों का खेल
रंगों के संग ।

अपनी ही मस्ती
अपनी ही धुन
भूल सब गम
हर ओर  हुड़दंग।

जी ले मुसाफिर
हर पल को जीभर
दिन ज़िंदगानी के
मिले हैं चंद ।

डॉ अर्चना गुप्ता

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *